बहुत समय पहले राजस्थान के टोंक जिले के एक छोटे से गाँव में एक गरीब लेकिन नेक दिल किसान रहता था। नाम था धन्ना जाट। पढ़ाई-लिखाई से ज़्यादा वास्ता नहीं था, पर भगवान से दोस्ती जैसी श्रद्धा थी। सुबह उठकर खेतों में जाना, दोपहर को हल चलाना, और शाम को किसी पेड़ के नीचे बैठकर भगवान का नाम लेना यही उसकी दिनचर्या थी।

धन्ना जाट
धन्ना की एक आदत थी वो भगवान को कहीं दूर नहीं मानता था, बल्कि आसपास महसूस करता था। पर उसे यह नहीं पता था कि भगवान से मिलना कैसे होता है, पूजा कैसे की जाती है। ना कोई विधि, ना कोई मंत्र, बस सीधा प्रेम। एक दिन वह गाँव के मंदिर गया, जहाँ एक ब्राह्मण पूजा कर रहा था। उसने देखा कि ब्राह्मण भगवान की मूर्ति के सामने रोटी, दाल, फल रख रहा है और घंटी बजा-बजाकर मंत्र पढ़ रहा है। धन्ना चुपचाप खड़ा देखता रहा। फिर मासूमियत से पूछ बैठा, “पंडित जी, क्या सच में भगवान ये खाना खाते हैं?”
ब्राह्मण ने शायद हल्के मज़ाक में या झुंझलाकर जवाब दिया, “अगर भक्ति सच्ची हो, तो भगवान सबकुछ करते हैं, खाना भी खाते हैं।” बस, धन्ना को यही बात दिल से लग गई। उसकी आँखों में चमक आ गई। उसने झट कहा, “तो मुझे भी अपने ठाकुर जी दो, मैं भी उन्हें खाना खिलाऊँगा।” पंडित झुंझलाकर पास पड़ा एक पत्थर उठा लाया और कहा:
“ये लो, यही हैं तुम्हारे ठाकुर जी। अब इन्हें रोज़ भोग लगाना, पूजा करना।”
धन्ना उस पत्थर को सिर से लगाकर घर ले आया। उसके लिए वो अब कोई मामूली पत्थर नहीं, बल्कि खुद भगवान श्रीकृष्ण थे। उसने उन्हें नहलाया, साफ़ कपड़े पर बिठाया, फूल, तुलसी और थोड़ा सा चंदन लगाया। फिर खेत से ताज़ा बाजरे की रोटी बनाई, गुड़ और छाछ के साथ एक थाली में परोस कर ठाकुर जी के सामने रख दी।
“ठाकुर जी, पहले आप खाइए। फिर मैं खाऊँगा,” उसने धीरे से कहा।
थाली वैसी की वैसी ही पड़ी रही। कोई न खाया, न थाली हिली। धन्ना इंतज़ार करता रहा… घंटों… फिर थाली उठाई, रखा, और खुद नहीं खाया। रोज़ यही क्रम दोहराया। भोग लगाता, प्रेम से पुकारता, और फिर बिना खाए रह जाता। कुछ दिन तो उसकी पत्नी चुप रही, फिर बोली, “तू पागल हो गया है क्या? पत्थर भगवान थोड़े होते हैं! रोज़ खाना बर्बाद करता है।”
धन्ना ने मुस्कुरा कर कहा, “वो भगवान हैं, उन्हें मेरी भक्ति से देर लग रही होगी। एक दिन ज़रूर आएँगे।”
दिन बीतते गए, धन्ना ने खाना छोड़ दिया। उपवास कर लिया। छठे दिन तो सिर्फ पानी पिया। सातवें दिन तो वो पूरी तरह टूट गया। आँखे सूजी हुई, पेट खाली, लेकिन दिल भरा हुआ। उस रात, उसने ठाकुर जी के सामने आखिरी बार थाली रखी और बोला, “आज अगर आपने नहीं खाया, तो मैं भी नहीं खाऊँगा, और इस बार हमेशा के लिए।” वो वहीं बैठा रहा, आँखें बंद कीं और धीरे-धीरे आँसू टपकने लगे। तभी एक तेज़ रोशनी कमरे में फैली और सामने एक दिव्य पुरुष खड़े थे साँवले रंग के, पीले वस्त्र, और चेहरे पर मुस्कान।
स्वयं भगवान श्रीकृष्ण प्रकट हो गए थे।
धन्ना एक पल के लिए चौंका, फिर जैसे उसके भीतर के सारे सवाल, सारी भूख, सबकुछ एक ही पल में शांत हो गया।
भगवान मुस्कुराए और बोले, “धन्ना, तुम्हारी भक्ति ने मुझे आने पर मजबूर कर दिया।”
फिर उन्होंने थाली की ओर हाथ बढ़ाया और रोटी का एक टुकड़ा तोड़कर खाने लगे।
धन्ना उनकी ओर देखता रहा, लेकिन अगले ही पल उसे कुछ ख्याल आया और वो बोल पड़ा, “अरे ठाकुर जी! सारा खाना आप ही खा जाओगे क्या? थोड़ा मेरे लिए भी छोड़ दो ना! मैं क्या खाऊँगा?”
भगवान ज़ोर से हँस पड़े। बोले, “धन्ना, तू अकेला भक्त है जिसने भगवान को भी बाँटकर खाना सिखा दिया।”
फिर उन्होंने आधी रोटी खुद खाई और आधी धन्ना को दी।
उस दिन भगवान सिर्फ खाना नहीं खा रहे थे, वो एक सच्चे प्रेम का उत्तर दे रहे थे। एक गरीब किसान की साधारण सी थाली से उन्हें वो स्वाद मिला जो स्वर्ग में भी नहीं मिलता। इसके बाद तो गाँव में चमत्कार होने लगे। एक बार जब खेत में बीज नहीं थे, धन्ना ने कंकर-पत्थर बो दिए, और बारिश के बाद वहाँ हरी-भरी फसल उग आई। एक दिन जब उसने खेत में उगे तुंबे (कद्दू) काटे, तो उनमें से मोती निकलने लगे। गाँव के ठाकुर को जब पता चला, उसने जमीन दान में दी और वहाँ एक तालाब खुदवाया जिसे आज भी लोग “मोती तालाब” कहते हैं। धीरे-धीरे धन्ना की ख्याति बढ़ने लगी, पर वो कभी घमंडी नहीं हुआ। कहता था, “मैं तो बस रोटी खिलाता हूँ, खाने वाला तो वही है।” धन्ना की भक्ति में कोई बड़ा उपदेश नहीं था, न कोई पंडिताई ज्ञान। वो सिर्फ मासूम प्रेम और भरोसे का नाम था। उसने भगवान से रिश्ता भक्त और भगवान का नहीं, बल्कि मित्र और अपने जैसे इंसान का बनाया।
👇 यह भी देखें:
आज भी उनकी तीन रचनाएं सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज हैं, जो बताती हैं कि भगवान कहीं बाहर नहीं, हमारे भीतर ही रहते हैं। धन्ना की कहानी हमें ये सिखाती है कि अगर भक्ति में दिखावा नहीं, बस सच्चा प्रेम और मासूमियत हो, तो भगवान भी अपना सिंहासन छोड़कर एक जाट किसान की थाली से रोटी खाने आ सकते हैं।
👉 अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो कृपया इसे शेयर करें और अपने सवाल या अनुभव कमेंट या ईमेल द्वारा साझा करें।


Finding a reliable link to W88 can be a hassle. linhvaow88 appears to be a pretty straightforward solution. Hopefully, keeps me connected! This takes you to linhvaow88.
Downloaded the kkkjililoginapp and it’s actually pretty smooth. Makes logging in a breeze. No more typos in the username, haha. Worth the download if you’re on mobile a lot.